‘समाजवाद’ पर परिचर्चा

शोध संस्था एंव स्वतंत्र थिंक-टैंक सेंटर फॉर दि स्टडी ऑफ़ सोसाइटी एंड पॉलिटिक्स (सीएसएसपी) ने रविवार को यानी की 24 दिसंबर, 2017 को “समाजवाद: पतन व पुनरुत्थान” पर परिचर्चा का आयोजन कराया.

अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था के रिसर्च असिस्टेंट पंकज कुमार ने कहा कि लोकतंत्र राजनीतिक दलों के माध्यम से चलता है जो विचारधारा पर आश्रित होते हैं. लेकिन सत्ता में आने पर ये दल विचारधारा की अवहेलना कर ‘लोक-लुभावन’ नीतियों का अनुसरण करने लगते हैं. समाजवाद भी ऐसी ही एक विचारधारा है. इसके पालन का दावा करने वाले दल ने सत्ता में आने पर इसे नुकसान पहुँचाया है और उसका खामियाजा भी भुगता है.

CSSP के फेलो डॉ संजय कुमार ने विषय का प्रवर्तन किया और आज की वर्तमान राजनीतिक परीस्थियों में प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक निर्णयों को समाजवाद से जोड़ने का प्रयास किया. उन्होंने लोहिया, गाँधी, मार्क्स के विचारों के सन्दर्भ में समाजवाद की विचारधारा में आये विचलन को रेखांकित किया.

कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आशुतोष सक्सेना ने विचारधारा में गिरावट को एक वैश्विक घटना बताते हुए उसके कारणों पर प्रकाश डाला. अमेरिकी विचारक फुकोयामा ने पहले ही ‘विचारधारा के अंत’ की आशंका प्रकट की थी. समाजवादी पार्टियों ने समाजवाद को एक ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की लेकिन उनके अनुसार गाँधी का समाजवाद आदर्श समाजवाद था.

डॉ सक्सेना ने कहा कि गठबंधन सरकारें और ‘न्यूनतम साझा कार्यक्रम’ विचारधारा के अनुपालन पर स्वयं प्रश्न चिन्ह हैं.

क्राइस्ट चर्च कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ ए एन त्रिपाठी ने कहा कि समाजवाद में उत्पादन के साधनों पर सामाजिक स्वामित्व एक कोरा आदर्श है. मुख्य प्रश्न यह है कि खुशहाली को अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचाया जाय.

दिल्ली से आई निकिता पाठक ने महिलाओं के मुद्दों को उठाते हुए प्रश्न किया कि क्या पूँजीवाद ने महिलाओं की समस्या को बढ़ा तो नहीं दिया है और क्या समाजवाद के पास उसका समाधान करने की वैकल्पिक क्षमता है. क्या जहां समाजवाद है वहां महिलाओं को वर्चस्व नहीं झेलना पड़ रहा है?

क्राइस्ट चर्च कॉलेज में दर्शन शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ डी सी श्रीवास्तव ने मुख्य रूप से इस पर बल दिया कि किसी भी विचारधारा का आंकलन वस्तुनिष्ठ आधार पर होना चाहिए तथा उन्होंने समाजवाद लाने के लिए इस बात पर बल दिया कि यह प्रयास किया जाय कि जाति और वर्ग की भिन्नता को समाप्त करने के लिए किस समन्वयकारी तत्व का सहारा लिया जाय.

आईआईटी-कानपुर के प्रोफेसर ए.के. शर्मा ने अपने अध्यक्षीय भाषण मे बताया कि समाजवाद किसी भी समाज में किसी भी प्रकार के वर्चस्व के विरुद्ध सतत चलने वाला संघर्ष है. उन्होंने जातिवादी-समूह के माध्यम से समाज में उस संघर्ष को आगे बढ़ाने की वकालत की. उन्होंने आरक्षण, महिलाओं की स्थिति, जातीय एवं वर्गों के समूह के सन्दर्भ में समाजवाद को देखने का आह्वान किया.

अंत में CSSP के निदेशक डॉ. ए. के. वर्मा ने सभी को धन्यवाद देते हुए समाजवाद पर अपने विचार रखे. उन्होंने समाजवाद के पतन और पुनरुत्थान पर चर्चा की.

इस अवसर पर प्रो. ए.एन. त्रिपाठी, डॉ डीसी श्रीवास्तव, विजयवर्की, अरुण प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. रानी वर्मा, वरुण त्रिपाठी , एमपी श्रीवास्तव, कु० पूनम रॉय, कमल श्रीवास्तव, अभय, श्रीकांत, मानवेंद्र, विकास, नम्रता, सर्वजीत, पूनम आदि अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.

कार्यक्रम से संबंधित कुछ और तस्वीरे नीचे हैं.

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